मेले का वर्णन करते हुए पिता जी को पत्र – Mele Ka Varnan karte Hue Pitaji Ko Patra in Hindi

दिनांक: __________

__________ ,
__________ (पिता जी का पता)

आदरणीय पिता जी,
सादर चरणस्पर्श।

मैं यहां पर सकुशल हूं और आप सब की कुशलता के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता हूं। आगे समाचार यह है कि इस ___________ (रविवार) को मैं अपने मित्रों के साथ यहां पर चल रहे एक मेले में गया था। बहुत वर्षों बाद किसी मेले में जाकर बहुत अच्छा लगा।
इससे पहले मैं बचपन में आपके साथ मेले में गया था। वो बचपन की यादें ताजा हो आई।

यहां पर इस मेले में बड़े-बड़े झूले थे। कुछ छोटे झूले भी थे छोटे बच्चों के लिए। कहीं पर जादुगर अपना खेल दिखा रहा था, तो कहीं गुब्बारे फोड़ने की प्रतियोगिता में इनाम जीतने की होड़ लगी थी। एक जगह सर्कस भी लगा हुआ था और लाफिंग गैलरी का तो जवाब ही नहीं, हंस हंस कर लोग लोट-पोट हुए जा रहे थे। एक तरफ़ खाने पीने की दुकानें और खोमचे लगे हुए थे। कहीं बर्फ वाले गोले और कहीं कुल्फी फालूदा की रेहड़ी लगी हुई थी।

लोग अन्दर प्रत्येक स्टाल की टिकटें खरीद कर खेल तमाशा देख रहे थे। एक जगह कुश्ती प्रतियोगिता हो रही थी। अन्त में प्रवेश टिकट पर एक लकी ड्रा भी होना था। हम सभी मित्र लकी ड्रॉ के लिए भी रुके। जैसे ही प्रथम पुरस्कार के लिए टिकट का नम्बर पुकारा गया मैं हैरान हो गया क्योंकि मेरे पास उसी नम्बर की टिकट थी। मुझे ________ (प्रथम) पुरस्कार में एक ________ (इनाम) मिला।
मुझे वहां मेले में बहुत आनन्द आया।

आप सब अपना ख्याल रखना।

आपका पुत्र,
___________ (अपना नाम )

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